Balance of Life

“Balance is not something you find, it’s something you create.”—Jana Kingsford

मैंने जिंदगी को जब भी तराजू में तोल कर देखा..
हर वो किमती चिज हटानी पड़ी.
जूठे रिश्ते कुछ यू कफा हुए,
और अपनों ने मुझे बड़े प्यार से देखा.
हर वो रंग दुनिया के चमक उठे,
मैंने बेरंग को रंगीन होते जब देखा..
पहाड़ों पे चढ़ कर रोशिनी ढूंढी मेने,
आँख मुंदकर जब दिल शांत हुआ,
मेने रोशनी का मोह निकल ते देखा.
जो दबी हुई थी सांस और हंसी..
मैने गुलाब की तरह उसे खिलते देखा.
कोन मेरा इस दुनिया में, ये सवाल था मन में,
ये सवाल भूल गए ,जब मैंने खुद को खुलके जिन दिया..
जब भी ये तराजू दगमगाया, मैंने खुद को खुद पे शक करते देखा.
जो जान लिया खुद को पूरी तरह मेने,
तब जाके तराजू का सही मोल होते हुए देखा.
जिंदगी का ये सच तब जाके समझा मेने,
मैंने जिंदगी को तराजू में जब तोल के देखा.

जरा रुख

बोल दो, कि हम सुन सब ले ते हे….
मगर हम चुप होजाये तो वजहा मत पूछो…
अँधेरा ही करलो चाहे तोह आँखों के सामने मेरे..
ठोकरें खाते चले हम ,दिए की जरूरत नहीं हमें…
करलो शक तुम मेरे आज के मोजुदगी का….
तुम जैसो को सफाई देना नामंजूर है हमें..
बेशक मंजिल कतराएगी…
आहट दिल की ना सुनायेंगे कभी…
तुह लाख बोलले फरक नही..
मेरी जीत से तेरे हर बोल में फिर झूठे ठहेराऊँगी..
तू जरा रुक में फिर लौटकर आउंगी मैं…

Ek radu

ek vel asto jo purna pane apla asto
Gardit ekta aslyachi chahul karun deto
Abolke jagashi pan sau-vad swatahashich
bala balach thambunahi toh ek themb sarakto
ani anavar ashrun chi lat pasarun jate
mg hudakun radlya nantr yeto toh shanta pana
ha shantapana khara ki baher cha jag
nistarat swatala lavuni manche te dara
jyat dadpun basle kiti tri bol ani dukh sara
bharuni te chalat rahve ayushychya barobar shodhat sukhache nave vare