
मैंने जिंदगी को जब भी तराजू में तोल कर देखा..
हर वो किमती चिज हटानी पड़ी.
जूठे रिश्ते कुछ यू कफा हुए,
और अपनों ने मुझे बड़े प्यार से देखा.
हर वो रंग दुनिया के चमक उठे,
मैंने बेरंग को रंगीन होते जब देखा..
पहाड़ों पे चढ़ कर रोशिनी ढूंढी मेने,
आँख मुंदकर जब दिल शांत हुआ,
मेने रोशनी का मोह निकल ते देखा.
जो दबी हुई थी सांस और हंसी..
मैने गुलाब की तरह उसे खिलते देखा.
कोन मेरा इस दुनिया में, ये सवाल था मन में,
ये सवाल भूल गए ,जब मैंने खुद को खुलके जिन दिया..
जब भी ये तराजू दगमगाया, मैंने खुद को खुद पे शक करते देखा.
जो जान लिया खुद को पूरी तरह मेने,
तब जाके तराजू का सही मोल होते हुए देखा.
जिंदगी का ये सच तब जाके समझा मेने,
मैंने जिंदगी को तराजू में जब तोल के देखा.


